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हज यात्रियों पर ₹10 हजार का अतिरिक्त बोझ, भड़के अनीस मंसूरी

बोले— “गरीब हाजियों की मजबूरी को बना दिया वसूली का जरिया, सरकार जवाब दे”

रिपोर्ट: ज्ञान सिंह | सार्थक टाइम्स


लखनऊ। हज यात्रा की शुरुआत के साथ ही देशभर के आज़मीन-ए-हज पर ₹10 हजार के अतिरिक्त “डिफरेंशियल एयरफेयर” का बोझ डालने का मामला अब विवाद का रूप लेता जा रहा है। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने इस फैसले को गरीब हाजियों का खुला आर्थिक शोषण बताते हुए केंद्र सरकार और हज कमेटी पर तीखा हमला बोला है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि हज जैसे मुकद्दस सफर के लिए गरीब और मध्यम वर्गीय मुसलमान सालों तक अपनी पाई-पाई जोड़ते हैं, लेकिन यात्रा शुरू होते ही उन पर अचानक ₹10 हजार का अतिरिक्त बोझ डाल देना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष दानिश आजाद अंसारी ने हाजियों को भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया था, तभी उन्हें अंदेशा हो गया था कि आगे कोई बड़ा विवाद सामने आएगा। अब सरकार ने रवानगी के अंतिम चरण में हर हाजी पर आर्थिक “कर्ज़” थोपकर उनकी आशंका को सही साबित कर दिया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब हज यात्रा का बजट और किराया महीनों पहले तय हो चुका था, तो आखिरी समय में यह अतिरिक्त वसूली किस आधार पर की जा रही है। मंसूरी ने आरोप लगाया कि सरकार यह मानकर चल रही है कि हाजी मजबूर हैं और उनसे कुछ भी वसूला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अभी हज मुकम्मल भी नहीं हुआ और सफर की शुरुआत में ही सरकार ने हर हाजी को अपना कर्जदार बना दिया।
पूर्व मंत्री ने केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू और हज कमेटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों से इस फैसले का स्पष्ट आधार सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसलों की जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षरों का सहारा लिया जा रहा है।
अनीस मंसूरी ने उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी की खामोशी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दानिश आजाद अंसारी को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हाजियों के हित में आवाज बुलंद करनी चाहिए और ₹10 हजार की बढ़ोतरी तत्काल वापस लेने की मांग करनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया और वसूली गई रकम लौटाई नहीं गई, तो पसमांदा मुस्लिम समाज इस मुद्दे को सड़क से लेकर सत्ता तक उठाएगा। उनके मुताबिक यह सिर्फ आर्थिक बोझ का मामला नहीं, बल्कि लाखों गरीब हाजियों की भावनाओं और आस्था से जुड़ा सवाल है।

सार्थक टाइम्स न्यूज

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