डिगडिगा गांव में हादसे से मचा हड़कंप, ग्रामीणों का आरोप—एसडीओ से लेकर जेई तक कई बार दी गई थी सूचना, फिर भी नहीं बदला गया पोल
लखनऊ। चिनहट थाना क्षेत्र के डिगडिगा गांव में जर्जर बिजली का पोल गिरने से गंभीर रूप से घायल हुई 48 वर्षीय उषा पत्नी आशाराम की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों और ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की है।
परिजनों के मुताबिक, उषा अपने घर से किराना की दुकान की ओर जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में अचानक जर्जर बिजली का पोल भरभराकर उनके ऊपर गिर पड़ा। पोल की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में उनके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आईं। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां करीब दो-तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 19 अगस्त 2026 को उषा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
एसडीओ से लेकर जेई तक ग्रामीणों ने दी थी सूचना
ग्रामीणों का आरोप है कि हादसे का कारण बना बिजली का पोल पहले से ही बेहद जर्जर और क्षतिग्रस्त हालत में था। इसकी जानकारी एसडीओ से लेकर जेई तक विद्युत विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार दी गई थी। ग्रामीणों ने पोल बदलने की मांग भी की थी, लेकिन आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समय रहते पोल को नहीं बदला गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्युत विभाग ने समय रहते जर्जर पोल को बदल दिया होता तो शायद उषा की जान बचाई जा सकती थी। हादसे के बाद ग्रामीणों में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भारी आक्रोश है।
महिला की मौत के बाद भी बिजली आपूर्ति को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक, पोल गिरने के बाद जब महिला उसके नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हुईं तो विद्युत विभाग को फोन कर बिजली आपूर्ति बंद करने की सूचना दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि फोन करने के बावजूद तत्काल बिजली नहीं काटी गई।
वहीं, जब इस संबंध में एसडीओ से बात की गई तो उनका कहना था कि प्रधान की सूचना पर बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इसको लेकर ग्रामीणों और विद्युत विभाग के बयान में अंतर सामने आ रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
गिरे हुए पोल को दोबारा खड़ा करने का आरोप

ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हादसे के बाद विभागीय कर्मचारियों ने रातों-रात गिरे हुए पोल को दोबारा आगे की ओर खड़ा कर दिया। आरोप है कि पोल को पर्याप्त मजबूती देने के लिए सीमेंट-मौरंग का इस्तेमाल करने के बजाय उसे मिट्टी में ही गाड़ दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में मिट्टी नरम होने के कारण पोल दोबारा झुक या गिर सकता है। यदि इसे मजबूत तरीके से स्थापित नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में दोबारा कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
एक हादसे ने खोली विद्युत विभाग की व्यवस्था की पोल
उषा की मौत के बाद ग्रामीणों का सवाल है कि जब जर्जर पोल की सूचना पहले से विभागीय अधिकारियों को दी जा चुकी थी तो उसे समय रहते बदला क्यों नहीं गया? हादसे के बाद भी यदि पोल को स्थायी और सुरक्षित तरीके से नहीं लगाया गया है तो यह विभागीय लापरवाही का गंभीर मामला माना जा सकता है।
परिजनों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, एसडीओ से लेकर संबंधित जेई और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है।
अब सवाल यह है कि एक महिला की जान जाने के बाद विद्युत विभाग इस मामले से क्या सबक लेता है और डिगडिगा गांव सहित क्षेत्र में मौजूद अन्य जर्जर बिजली के पोलों को लेकर कब तक प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
सार्थक टाइम्स न्यूज़ | ज्ञान सिंह, ब्यूरो हेड, लखनऊ










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