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एनएचएम संविदा कर्मियों ने खोला मोर्चा, नियमितीकरण व समान काम-समान वेतन की मांग

एक लाख से अधिक कर्मचारियों के हित में छह सूत्रीय मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन  12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी सेवाएं दे रहे संविदा कर्मचारियों ने अब अपनी लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। गुरुवार को अकबरपुर स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय परिसर में बड़ी संख्या में एनएचएम संविदा कर्मचारी एकत्र हुए और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार तरीके से आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ (रजि.) की जिला शाखा अंबेडकरनगर के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए नियमितीकरण, समान कार्य-समान वेतन समेत छह सूत्रीय मांगों को तत्काल पूरा किए जाने की मांग की।

संघ के जिलाध्यक्ष वंशमणि पाण्डेय एवं जिला महामंत्री डॉ. राहुल श्रीवास्तव की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एक लाख से अधिक संविदा कर्मचारी पिछले करीब 15 से 18 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों की सेवाएं प्रदेश के ग्रामीण, पिछड़े एवं दुर्गम क्षेत्रों से लेकर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला चिकित्सालयों तथा विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों तक लगातार जारी हैं।

कोविड काल में भी जान जोखिम में डालकर निभाई जिम्मेदारीसंगठन का कहना है कि एनएचएम संविदा कर्मचारियों ने कोरोना महामारी जैसे बेहद कठिन दौर में भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के बजाय पूरी निष्ठा के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखा। कोविड-19 के दौरान कर्मचारियों ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता किए बिना लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने, जांच, टीकाकरण, जागरूकता एवं अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।वर्तमान समय में भी टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीबी उन्मूलन, संचारी एवं गैर-संचारी रोग नियंत्रण सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में एनएचएम संविदा कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में इन कर्मचारियों का योगदान किसी भी स्तर पर कम नहीं है।15-18 वर्षों की सेवा के बाद भी नियमितीकरण का इंतजार संविदा कर्मचारियों की सबसे प्रमुख मांग नियमितीकरण को लेकर है। संघ के जिलाध्यक्ष वंशमणि पाण्डेय और जिला महामंत्री डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने शासन से मांग की है कि वर्षों से लगातार सेवा दे रहे एनएचएम संविदा कर्मचारियों के अनुभव और निरंतर सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए नियमितीकरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए।

संगठन का कहना है कि यदि नियमितीकरण में समय लगता है तो तब तक संविदा कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए तथा वर्तमान मानदेय में आवश्यक वृद्धि की जाए, जिससे बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों और उनके परिवारों का जीवन यापन सम्मानजनक तरीके से हो सके। कैशलेस इलाज, डीए, ईपीएफ, एचआरए और ग्रेच्युटी की भी मांग संघ की मांगों में केवल नियमितीकरण और वेतन ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सामाजिक एवं आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं। संगठन ने एनएचएम संविदा कर्मचारियों एवं उनके आश्रित परिवारों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की फैमिली फ्लोटर कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।इसके अलावा कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए), ईपीएफ, एचआरए एवं ग्रेच्युटी का लाभ दिए जाने की मांग भी उठाई गई है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना बेहद जरूरी है। गैर जनपद स्थानांतरण और अनुकंपा नियुक्ति की मांग

ज्ञापन में रिक्त पदों के सापेक्ष एनएचएम संविदा कर्मचारियों को गैर जनपद स्थानांतरण की सुविधा दिए जाने की मांग की गई है। वहीं सेवा के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके पात्र आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है।संगठन ने आउटसोर्स कर्मचारियों के हित में उन्हें जिला स्वास्थ्य समिति में समायोजित किए जाने तथा नियमित पदों पर होने वाली भर्ती में एनएचएम संविदा कर्मचारियों के लिए कम से कम 25 प्रतिशत सीटों का कोटा निर्धारित किए जाने की मांग भी उठाई है।12 अक्टूबर से लखनऊ में अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी एनएचएम संविदा कर्मचारी संघ ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम भी घोषित किया है। संगठन के अनुसार 5, 6 एवं 7 अक्टूबर को कर्मचारियों ने काली फीता बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। इसके बाद 8, 9 एवं 10 अक्टूबर को जनपद मुख्यालयों पर कार्य बहिष्कार/कार्यविराम के माध्यम से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।

संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में शासन की ओर से मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 12 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर के एनएचएम संविदा कर्मचारी पूर्ण संख्या बल के साथ लखनऊ पहुंचकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे।आंदोलन को लेकर पदाधिकारियों ने संभाली कमान आंदोलन को सफल बनाने के लिए संगठन के पदाधिकारी लगातार कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं। जिला संयोजक प्रीतम विक्रम, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. आमिर अब्बास, उपाध्यक्ष मोहम्मद आसिफ, सचिव संध्या सिंह, प्रवक्ता विवेक तिवारी, मीडिया प्रभारी मनीष वर्मा, मंत्री षिषुवेन्दु यादव, कोषाध्यक्ष पवन कुमार, संगठन मंत्री विजय कुमार उपाध्याय, कपिल देव शर्मा, महिला संगठन मंत्री संघमित्र बौद्ध तथा कार्यकारिणी सदस्य प्रवीण गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी आंदोलन को लेकर सक्रिय हैं।

ज्ञापन की प्रतियां अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश तथा संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारी संगठनों को भी भेजी गई हैं।

स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं संविदा कर्मचारी

संगठन ने कहा कि एनएचएम संविदा कर्मचारी लंबे समय से प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने से लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को धरातल पर लागू करने तक इन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में उनके भविष्य को सुरक्षित करना और उन्हें सम्मानजनक सेवा शर्तें उपलब्ध कराना शासन की जिम्मेदारी है।

संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते मांगों का समाधान कर दिया जाता है तो प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को टाला जा सकता है। वहीं यदि मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो प्रदेशभर के संविदा कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलन को निर्णायक दिशा देने के लिए बाध्य होंगे।

ज्ञान सिंह ब्यूरो सार्थक टाइम्स न्यूज

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