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उत्तर प्रदेश: NHM संविदा कर्मियों और CHO की हड़ताल पर विराम, शासन स्तर की उच्चस्तरीय बैठक में मांगों पर बनी सहमति

Cho NHM

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CHO कर्मचारियों की जीत की उम्मीद जगी, अब सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार।

लखनऊ: सार्थक टाइम्स न्यूज़ 
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मियों और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) की लंबी मांगों और कार्य बहिष्कार को लेकर आखिरकार शासन स्तर पर सकारात्मक सहमति बन गई है। प्रमुख सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की संयुक्त अध्यक्षता में 28 अक्टूबर 2026 को संगठन के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद जारी आधिकारिक कार्यवृत्त और शासन के रुख से प्रदेशभर के हजारों संविदा कर्मियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले कई हफ्तों से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सीएचओ और संविदा कर्मियों के कार्य बहिष्कार व धरने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा था। इस बीच शासन के साथ हुई इस मैराथन बैठक में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर आधिकारिक निर्णय लिए गए हैं: 1. वेतन विसंगति और PBI मर्जर पर समिति करेगी विचार
मुद्दा: संगठन लंबे समय से मांग कर रहा था कि AB-HWC गाइडलाइन के अनुसार वेतन विसंगति दूर की जाए और अन्य राज्यों (जैसे बिहार) की तर्ज पर परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) को मूल वेतन में मर्ज करते हुए ₹32,000 + ₹8,000 (Fixed & PBI) का स्ट्रक्चर लागू किया जाए।
आधिकारिक रुख: शासन ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार समान वेतन लागू करने की कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है। PBI के गैप को भरने के लिए केंद्र सरकार को अर्द्धशासकीय पत्र भेजा जा चुका है। अन्य राज्यों की व्यवस्था का परीक्षण कर ‘वेतन नीति समिति’ द्वारा इस पर अतिशीघ्र अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
2. CHO कैडर निर्माण और नीति निर्धारण के लिए प्रक्रिया तेज
मुद्दा: सीएचओ के लिए एक स्पष्ट, ठोस नीति और कैडर निर्माण की मांग को लेकर संविदा कर्मी मुखर थे।
आधिकारिक रुख: शासन स्तर पर समकक्षा, भारतांक (Weightage) और आयु सीमा में शिथिलता प्रदान करने हेतु नियमावली में संशोधन की पत्रावली वर्तमान में प्रक्रियाधीन है, जिस पर जल्द ही मुहर लगने की संभावना है।
3. हड़ताल अवधि के वेतन और कार्रवाई पर निर्देश
मुद्दा: 28 सितंबर से चल रहे आंदोलन व धरने के दौरान की गई कार्रवाई तथा इस अवधि के वेतन काटे जाने को लेकर असमंजस की स्थिति थी।

NHM शासन ने पहले ही 23 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में दिशा-निर्देश (पत्रांक-4333) जारी कर दिए हैं। तदनुसार, जनपद स्तर पर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि सीएचओ 28 अक्टूबर 2026 तक अपना धरना समाप्त कर कार्य पर लौट आते हैं, तो इस अवधि का वेतन और अन्य अनुमन्य प्रक्रियाएं सुचारू रूप से आगे बढ़ाई जाएंगी।
काम पर लौटने का आश्वासन और स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण ग्रामीण अंचलों में टीकाकरण और सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हो रही थीं। हालांकि, शासन के साथ सकारात्मक वार्ता के बाद संयुक्त मोर्चा सीएचओ उत्तर प्रदेश ने यह आधिकारिक रूप से आश्वस्त किया है कि 29 अक्टूबर 2026 से सभी सीएचओ और संविदा कर्मी अपने-अपने कार्यस्थलों पर समय से उपस्थिति दर्ज कराएंगे और पूरी निष्ठा के साथ चिकित्सीय सेवाओं का संपादन सुनिश्चित करेंगे। संगठन ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों की पुनरावृत्ति नहीं की जाएगी।
शासन और कर्मचारी संगठन के बीच बनी इस सहमति से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है और उम्मीद जताई जा रही है कि अब प्रदेश के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी पर लौट आएंगी।

ज्ञान सिंह ब्यूरो रिपोर्ट

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