
लखनऊ में शहीद पथ निर्माण के नाम पर किसानों की ज़मीन के साथ हुए कथित घोटाले ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिलाधिकारी भूमि अर्जन कार्यालय द्वारा ऐसे गाटा नंबरों का अधिग्रहण कर लिया गया, जिनका शहीद पथ निर्माण से कोई सीधा संबंध नहीं है। भारतीय किसान यूनियन अवध (अरा) राजू गुप्ता संगठन द्वारा भेजे गए नोटिस में आरोप लगाया गया है कि ग्राम हरिहरपुर सहित कई गांवों की कृषि भूमि को बिना ठोस जांच और पारदर्शिता के अधिग्रहित कर लिया गया, जबकि यह भूमि न तो शहीद पथ के नक्शे में आती है और न ही वास्तविक निर्माण क्षेत्र में शामिल है।
नोटिस के अनुसार गाटा संख्या 728, 729, 730, 731, 704 और 868 जैसी जमीनें शहीद पथ के पश्चिम दिशा में स्थित हैं और आज भी खाली पड़ी हैं। इसके बावजूद लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा इन पर कब्जा प्रक्रिया अपनाई गई। किसानों का कहना है कि अधिग्रहण से पहले उन्हें न तो सही जानकारी दी गई और न ही यह बताया गया कि उनकी भूमि परियोजना के दायरे में क्यों लाई जा रही है। जांच के बिना मुआवज़ा देकर ज़मीन लेने की यह कार्रवाई किसानों के साथ खुला छल बताया जा रहा है।

मामले में और गंभीर आरोप यह हैं कि तहसील, परिषद और संबंधित विभागों के कुछ कर्मचारियों व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी किसानों के नाम पट्टे तैयार किए गए। इन्हीं फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर प्रॉपर्टी डीलरों के माध्यम से कई करोड़ रुपये के सरकारी धन का गलत भुगतान कराया गया। कुछ गांवों में जांच के बाद फर्जी पट्टे निरस्त भी किए गए, लेकिन किसानों का आरोप है कि फर्जी मुआवज़े की राशि अब तक वापस नहीं ली गई, जिससे पूरे अधिग्रहण प्रक्रिया पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
भारतीय किसान यूनियन अवध (अरा) राजू गुप्ता संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शहीद पथ से अलग पड़ी ज़मीनों की निष्पक्ष जांच कर किसानों की भूमि वापस नहीं की गई, तो 29 दिसंबर 2025, सोमवार को शहीद पथ से जुड़े गाटा नंबरों पर किसान पंचायत और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ ज़मीन की नहीं, बल्कि किसानों के अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही की है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब ज़मीन शहीद पथ निर्माण के दायरे में थी ही नहीं, तो उसका अधिग्रहण क्यों किया गया, फर्जी पट्टों से निकले करोड़ों रुपये किसकी जेब में गए और इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी। लखनऊ में शहीद पथ के नाम पर उजागर हुआ यह मामला अब एक बड़े प्रशासनिक घोटाले की शक्ल लेता जा रहा है और अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन की आंच और तेज़ होना तय माना जा रहा है।
ज्ञान सिंह ब्यूरो रिपोर्ट









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